रिश्ते की अहमियत!

तरुण शुक्‍ला: जब एक बच्चा मां के गर्भ में पनपता है, तभी से एक अनोखे रिश्ते की शुरुआत होती है। किसी भी रिश्ते की शुरुआत एक अद्भुद रुप में होती है। जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हम एक नए रिश्ते की डोर मे बंधते जाते है। सबसे पहले अगर किसी रिश्ते की शुरुआत होती है तो माता- पिता के पवित्र रिश्ते से होती है। धीरे-धीरे हम कई रिश्तों की डोर में बंधते जाते है। मां अपने बच्चे को किस तरह पालपोष कर बड़ा करती है, यहीं से एक रिश्ता कायम होता है। धीरे-धीरे रिश्ते की डोर खुलती जाती है। हमारे जीवन में कई रिश्ते जन्म लेते हैं और टूट जाते है। एक रिश्ता एैसा होता है जो कभी नही टूटता माता- पिता से।

अधिकांश देखने को मिलता है कि हम हर रिश्ते की अहमियत तब समझ पाते है , जब उस रिश्ते का अन्त होने लगता है। जिस प्रकार एक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता पड़ती है। ठीक उसी तरह जीवन व्यतीत करने के लिए एक सहारे की जरुरत होती है जिसे हम रिश्ता बोल सकते है। एक अच्छे रिश्ते के लिए लोगों में कई बातों का होना बहुत जरुरी होता है, जैसे- दो लोगों के बीच अच्छा तालमेल होना, सामान आदतों के लोगों के बीच सम्पर्क, एक दूसरे की भावनाओं को समझना।
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देर रात को भी बिना किसी शिकायत के मेरी मनपसंद सब्जी के साथ मेरी राह देखती मां की सबसे ज्यादा कीमत मुझे अब समझ में आती है। वाकई कितना आसान था उस समय उसे यह कह देना कि- मैं तो बाहर से खाकर आया हूं। आज नौकरी के चलते पहली बार घर से दूर आया हूं। यहां अपने कपड़े खुद धो रहा हूं और रोज बाहर का कच्चा-पक्का खा रहा हूं, तब समझ में आ रहा है कि मां को वो इंतजार और उसके बाद मिलने वाला मेरा जवाब कितना चुभता होगा पर उसने कभी शिकायत नहीं की। इस बार सबसे पहले घर जाकर मां से अब तक के किए की माफी मांगूंगा।

ऐसा कहते हुए 26 वर्षीय मोहित की आंखें नम हो जाती हैं। घर से पढ़ाई के लिए निकले किसी युवक की ये भावनाएं बिलकुल भी नई नहीं हैं। असल में आपके अपने जो हमेशा आपके आस-पास सुविधा और सुरक्षा का घेरा बनाकर आपको रखे रहते हैं, आप बड़ी आसानी से उनके प्रयासों को नजरअंदाज कर जाते हैं। यह सोचकर कि यह तो उनका कर्तव्य है। आपकी नजरों में उनकी अहमियत ही नहीं होती।

ऐसा ही एक और सामान्य उदाहरण उस पति का भी हो सकता है जिसकी पत्नी सालों से उसकी दिनचर्या के हिसाब से उसे भोजन पकाकर देने, ऑफिस के लिए अलमारी से कपड़े के साथ-साथ मैचिंग रूमाल निकालकर रखने, हर महीने में दी गई धनराशि में घर खर्च चलाने, बच्चों को स्कूल लाने-छोड़ने से लेकर बिजली का बिल भरने तक का काम बिना किसी शिकायत के कर रही है और गाहे-बगाहे अचानक आ टपके उसके दोस्तों की मेहमाननवाजी भी वह थोड़ी चिंता या खीज के बाद कर देती है लेकिन पति को तब पत्नी की अहमियत समझ नहीं आती।3e52c774-7486-4940-90cd-f6f94d131b9c

इस पर भी कभी-कभी सब्जी में नमक कम है या शर्ट की बटन अब तक नहीं टांकी जैसे जुमले बोलकर… दफ्तर का गुस्सा या अपनी खीज पतिदेव उस पर उतार डालते हैं। यह बात पति या पुत्र या किसी भी एक व्यक्ति की नहीं है…। इस उदाहरण में किसी स्त्री का भी नाम हो सकता है। मुख्य बात यह कि अपने किसी एक करीबी रिश्ते की अहमियत समझने और उसकी कद्र करने की हम कई बार जरूरत ही नहीं समझते। इसके उलट कई बार हम उस व्यक्ति को या उसके प्रयासों को नजरअंदाज करने के साथ ही उसके प्रति कठोर तथा नकारात्मक रुख भी अपना लेते हैं।

 

श्रवण शक्ति कमजोर हो चुकने के बाद बुजुर्ग पिता का जोर से बोलना आपकी चिंता का कारण बन जाता है लेकिन उस समय आप ये भूल जाते हैं कि ये वही पिता हैं, जो बुखार आने पर रात-रातभर आपके सिरहाने बैठे रहे थे या आपके एक महंगे खिलौने की मांग पर जिन्होंने अपने वेतन से अग्रिम लिया था। या फिर किसी पार्टी में पत्नी की साधारण वेशभूषा आपके गुस्से का कारण बन जाती है जबकि पत्नी आपके द्वारा दी गई सीमित धनराशि में पूरे घर का खर्च चलाती है और पिछले कई सालों से बाकी खर्चों के चलते अपने लिए साड़ियां लाना टालती जा रही है।अगर वक्त गुजर जाने के बाद आपको अपनों की कीमत समझ आए तो? इसलिए अपनों की इस अनमोल पूंजी को सहेजकर रखिए। वैसे भी आपके अपने आपसे सिर्फ प्रेम की आस रखते हैं और कुछ नहीं।

नए और चमक से भरे रिश्ते अक्सर समय के साथ अपनी चमक खो देते हैं जबकि दिल से बने प्रेम व अपने से रिश्ते कठिन समय में भी आपके साथ बने रहते हैं। इसलिए सच्चे रिश्तों तथा मन से जुड़े लोगों का मोल पहचानना बहुत जरूरी है। तभी कोई रिश्ता एक अच्छा और अनमोल रिश्ते के रुप में तब्दील होता है।

रिश्तों की बगिया में एक रिश्ता नीम के पेड़ जैसा रखना , जो सीख भले ही कड़वी देता हो पर तकलीफ में मरहम भी वही बनता है।

परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना, मनुष्य की सबसे बड़ी कायरता है।




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