जी का जंजाल बना है जीका, बचने के लिए अपनाएं ये उपाय!!

जीका वायरस के नाम सुनते ही सब डरने लगे हैं और डरें भी क्‍यों ना? आखिर ये वायरस है ही इतना खतरनाक कि जो सूनता है डरने लगता है। डेंगू और चिकनगूनिया जैसे ये भी आम बीमारी लगती है, लेकिन ऐसा है नहीं। जीका बहुत ही खतरनाक वायरस है।

ये वायरस दिन के समय सक्रिय रहते हैं। इंसानों में ये मामूली बीमारी के रूप में जाना जाता है, लेकिन चंद रोज बाद इसके लक्षण इतने खतरनाक हो जाते हैं कि आपको मौत के मुंह में धकेल सकते हैं। हालिया एक स्टडी में ये बात सामने आई है, कि एशिया और अफ्रीका में दो अरब लोग इस वायरस के जंजाल से प्रभावित हैं।zika-virus1

भारत भी इस वायरस अछूता नहीं है। शोधकर्ताओं ने बताया है पाकिस्तान, फिलिपिंस, बांग्लादेश में ये वायरस ज्यादा प्रभावित है। कुछ साल पहले इस वायरस के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी। लेकिन साल 2016 के आंकड़े चौंका देने वाले हैं। अफ्रीका और ब्राजील में लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी दी है, कि जीका वायरस विस्फोटक तरीके से बढ़ रहा है।

जीका के लक्षण- पहले हल्का सा बुखार होता है। जीका वायरस मच्छर से फैलता है। यह सीधे नवजात को अपना शिकार बनाता है। इस वायरस से प्रभावित होने वाले बच्चे की सारी जिंदगी विशेष देखभाल करनी पड़ती है। जीका विषाणु से संक्रमित होने पर बुखार, त्वचा पर चकत्ते और आंखों में जलन, मांसपेशी और जोड़ों में दर्द की परेशानी होती है। यह लक्षण आमतौर पर 2 से 7 दिनों तक रहते हैं।

क्या है जीका वायरस का इतिहास-  वैसे तो जीका वायरस 1940 में सबसे पहले युगांडा में पाया गया था। लेकिन बाद में यह महामारी की तरह अफ्रीका के कई हिस्सों में फैला गया। अफ्रीका के बाद ये दक्षिण प्रशांत और एशिया के कुछ देशों में भी फैला। कुछ समय पहले यह लातिन अमेरिका पहुंचा और दो तीन-सालों में भारत में आ गया।

zika-किस साल में कहां दिखा ज्यादा असर-  सबसे पहले ये वायरस 1940 में युगांडा में पाया गया। फिर 2013 में फ्रांस पहुंचा। 2014 न्यू कैलिडोनिया और पूर्वी ऑस्ट्रेलिया में पाया गया। 2014 अमेरिकी राज्य चिली पहुंचा। 2015 ब्राजील 2400 नए मामले देखे गए। साल 2016 में ब्राजील और भारत में भी इसका असर दिखा। पिछले दिनों सिंगापुर में भी इसके कई मामले सामने आए हैं।

संक्रमण- यह एडीज एजिप्ती मच्छर के काटने से फैलता है। यही मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और पीत ज्वर के लिए जिम्मेदार होता है।

बचने के उपाय- मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढंक कर रखें और हल्के रंग के कपड़े पहनें। इसके अलावा, कीड़ों से बचाने वाली क्रीम और मच्छरदानी का उपयोग करें। मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए अपने घर के आसपास गमले, बाल्टी, कूलर आदि में भरा पानी निकाल दें।

चिकित्सा- अब तक इससे बचने के लिए कोई खास टीका नहीं बना है। लेकिन दवाईयों के सहारे, घर में आराम करके और खुश रहकर आप इसका रोकधाम कर सकते हैं।

 




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