संगीत के बिना नृत्य की कल्पना नहीं, भगवान विष्णु है भरतनाट्यम के प्रेरणा के स्त्रोत

नई दिल्ली: बहुत कम लोगों में ही ऐसी नैसर्गिक प्रतिभा होती है जिसमें वह विभिन्न मनोभावों को नृत्य के माध्यम से की को प्रस्तुत कर सके। नृत्य चाहे शास्त्रीय नृत्य हो, लोकनृत्य हो या फिर समकालीन नृत्यशैली, हर किसी के लिए समान टैलेंट होना आवश्यक है। BNatyam Tanya 074

दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सभागार में एक ऐसी ही नृत्य संध्या का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न शास्त्रीय संगीत के रागों पर आधारित भारतनाट्यमनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। जिसमे नृत्यांगना तान्या सक्सेना ने एक के बाद एक भरतनाट्यम नृत्य की बेजोड़ प्रस्तुतियां दीं। दर्शक उनकी प्रस्तुति से मंत्र-मुघ्ध हो गये।
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शुरुआत उन्होनें महान भक्ति कवि वल्लभाचार्य की संगीत रचना पर आधारित बंदिश से की। उन्होंने श्री कृष्ण के सौन्दर्य, नटखट स्वाभाव और उनके प्रेम में मग्न गोपियों की स्थिति तथा उसके रौद्र रूप का वर्णन अपनी नृत्यकला के द्वारा किया। साथ ही भगवान नारायण को नायक के रूप में प्रस्तुत करते हुए उनकी विराट आभा का को दर्शाया।
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दर्शकों के बताया कि “आज के वेस्टर्न होते भारत में, शास्त्रीय कलाओं को संजो के रखना बेहद आवश्यक है, और संजो के रखने के लिए ऐसी प्रस्तुतियों का होना भी उतना ही आवश्यक है”।
तान्या ने  मयूर की तरह चंचल गमन, सर्प की तरह लहराते लट, मत्स्य रूपी चक्षु की प्रस्तुति से तान्या ने दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।

 




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