“जिंदगी का लुत्फ उठाना है तो मौत से खेलो ” कहने वाले दुनिया छोड़ गए कादर खान

अभी भी याद आता है मुकद्दर के सिकंदर का वो फकीर जिसने एक टूटते बालक को कुछ ऐसे डॉयलॉग बोलकर जिंदगी में आगे बढ़ने का हौसला दिया था। मुकद्दर का सिकंदर लोगों को अमिताभ बच्चन के लिए ही नहीं बल्कि कादर खान के एक छोटे से रोल के लिए भी याद किया जाता है। नए साल के जश्न में जब पूरी दुनिया डूबी थी तो रूपहले पर्दे पर कॉमेडी का नया आयाम स्‍थापित करने वाला ये कलाकार हमेशा के लिए दुनिया से रूख्सत हो गया। 2019 का जश्न फीका हो गया इस खबर के आने से। पर कादर खान को ये दुनिया उनके अभिनय के लिए हमेशा याद करेगी।

81 साल के कादर खान ने 31 दिसंबर शाम छह बजे कनाडा के अस्पताल में अंतिम सांस ली। ये जानकारी उनके बेटे सरफराज ने दी। कादर खान का अंतिम संस्कार वहीं कनाडा में किया जाएगा। 81 वर्षीय कादर ख़ान प्रोग्रेसिव सुप्रान्यूक्लीयर पाल्सी डिसऑर्डर (पीएसपी ) के शिकार हो गए थे और इसकी वजह से उनके मस्तिष्क ने पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था।

इस खबर के आने के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर फैल गई है। तकरीबन एक दशक से ख़बरों से दूर अभिनेता कादर ख़ान का बचपन बहुत ही संघर्ष भरा रहा है और बाद के दिनों में उन्होंने बड़ी ही लगन और समर्पण से बॉलीवुड में अपनी एक पहचान बनाई। सिर्फ़ अभिनय ही नहीं बल्कि लेखन में भी उन्होंने शानदार काम किया। कादर खान ने कई मशहूर अभिनेताओं के डॉयलॉग भी लिखे।

कादर खान ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया। उनकी डेब्यू फ़िल्म थी ‘दाग’। इसके अलावा ‘खून पसीना’, ‘बुलंदी’, ‘नसीब’, ‘याराना’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘हिम्मतवाला’, ‘घर संसार’ से लेकर ‘हीरो नंबर 1’ तक हर तरह की फ़िल्में कीं। विलेन से लेकर चरित्र अभिनेता और हास्य अभिनेता तक उन्होंने अपने अभिनय के हर रंग बड़े पर्दे पर जीवंत किये। अभिनय के अलावा उन्होंने 250 फ़िल्मों में संवाद भी लिखे। कादर ख़ान के करियर की शुरुआत थियेटर से हुई। थियेटर शुरू करने के कुछ महीनों में ही कादर ख़ान अपने काम की वजह से काफी लोकप्रिय हो गए।

उसके बाद उन्होंने ‘बेनाम’, रोटी’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘परवरिश’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘सुहाग’, ‘नटवरलाल’, ‘याराना’, ‘लावारिस’ से ;लेकर ‘जैसी करनी वैसी भरनी’ समेत 250 फ़िल्मों के लिए लिखा। राजेश खन्ना की सुपरहिट फ़िल्म ‘रोटी’ के लिए उन्हें 1974 में एक लाख बीस हज़ार की रकम मिली थी। यह रकम तब बहुत बड़ी मानी जाती थी। ‘अंगार’ और ‘मेरी आवाज़ सुनो’ के लिए फ़िल्मफेयर से बेस्ट संवाद के लिए पुरस्कार जीतने वाले कादर ख़ान को 10 बार फ़िल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन का भी अवॉर्ड दिया गया।




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