लैब में इंसानी लीवर का विकास संभव ; अब्दुल्ला् चंद

जोराबट। जोराबाटा जोराबाट स्थित सीएमजे यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहे वैज्ञानिक अब्दुजला चंद ने आज पावर प्वााइंट प्रेजेंटेशन के जरिए इंसान के लीवर में होने वाली विभिन्नु तरह की बीमारियों पर विस्ताार से प्रकाश डाला, उन्होंंने बताया कि भारत में प्रति वर्ष 50 हजार से भी अधिक लोगों का लीवर बीमार होता है, लेकिन महज कुछ लोगों का ही लीवर प्रत्याारोपित किया जा सकता है, इसको ध्याेन में रखते हुए तीन लोगों ने मैंने चंद, अरूण चंद्र व डाक्टकर शिव रंजन ने एक नई खोल कर इंसान के लीवर को लैब में ही तैयार किया है, उन्हों ने बताया कि इस तरह का लीवर प्रत्याारोपित करने में भारी भरकम धनराशि का खर्च नहीं होगा, यह महज एक से दो लाख रूपए के अंदर संभव हो सकता है, इस खोज में डॉक्टचर तुहिन भौमिक व डॉक्ट र सोनल अस्था ना का भी काफी बडा योगदान रहा है, प्रेजेंटेशन के मौके पर डॉक्ट‍र भारती मित्त ल के अलावा नार्थ ईस्टस के कैंसर अस्पबताल एंड रिसर्च सेंटर के डायरेक्टेर डॉक्ट‍र एम एम बरूआ, डॉक्टार मेधी, विश्वडविधालय के कुलपति प्रोफेसर डॉक्टटर अशोक कुमार चौधरी आदि मौजूद थे, डाक्टरर बरूआ ने कहा कि हजारों लोग भारत में प्रत्येोक वर्ष लीवर की बीमारी से अपनी जान गंवाते हैं, सबसे अधिक पूर्वोत्तकर के लोग हैं, ऐसे में वैज्ञानिक चंद की नई खोज वाकई में प्रशंसनीय है व भारत के लिए एक गौरव की बात है।




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