बिता दी जवानी आजादी पाने में, जब निकले तो पता चला कुसूर कुछ भी न था

उम्र थी महज 33 साल और गजानंद शर्मा गलती से कुछ पाकिस्तानी रेंजरों को हाथ लग गए। उन्हें कभी ये पता नहीं चला कि उनका कुसूर क्या था लेकिन जेल की काल कोठरी में उन्हें बंद रखा गया। घर वालों ने मान लिया था कि अब वो नहीं रहे लेकिन दस्तावेजों के सत्यापन में ये बात उनके घर पहुंच गई तब घर वालों को उनके जिंदा होने का पता चला। अगर पाकिस्तान भाईचारा न दिखाता और स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले सद्भावना के तहत कुछ लोगों को न छोड़ता तो गजानंद पाकिस्तानी जेल में बिना कुसूर के पड़े रहते।

गजानंद की रिहाई हो गई है उनके परिजन उनसे मिलकर खुशी से झूम उठे हैं पर जीवन के वो युवा बसंत अब गजानंद को नहीं मिल सकते। ऐसी घटनाएं दुख देती हैं जब बिना कुसूर के लोगों को सजा काटनी पड़ती है जिससे उनका कोई लेना-देना नहीं होता। मछुआरे जीवन यापन के लिए मछली पकड़ने समंदर में जाते हैं और खुद पाकिस्तानी रेंजरों का शिकार हो जाते हैं। काश इन मामलों में पाकिस्तान अपनी दरियादिली दिखा पाता तो बहुत से गजानंदों को अपनी जवानी पाकिस्तानी जेलों में नहीं काटनी पड़ती।

भारत सरकार के प्रयासों के बाद पाकिस्तान ने विभिन्न जेलों में बंद 30 भारतीय नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस के दो दिन पहले रिहा किया। इसमें गजानंद के साथ 29 मछुआरे भी शामिल हैं। इन्हें लेकर ट्रेन वाघा बार्डर पहुंची, तो गजानंद के घर दीपावली जैसा माहौल हो गया। गजानंद की पत्नी सहित उनके बेटों को चार महीने पहले ही पता चला था कि गजानंद पाकिस्तान जेल में बंद हैं। इससे पहले तो उन्हें आभास भी नहीं था कि गजानंद उनकी जिंदगी में कभी लौटेंगे भी। मखनी देवी अपने पति से मिलकर खुशी का इजहार सिर्फ आंसुओं से कर पा रही हैं।




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