Category: संपादकीय

जरा सोचो! क्‍या आप सच में आजाद हैं?

एक व्‍यक्ति बहुत आराम से अपनी जिंदगी जी रहा था। जिंदगी में उसने...

Know Safety, No Pain.., No Safety, Know Pain. असल टशन हेलमेट पहनने में है।

काजल सिंह दोपहर के एक बजकर तीस मिनट हुए थे। मोहन नगर गाजियाबाद से...

जब सब रखेंगे अपनी सेना तो देश की सेना का क्या होगा ।।।

तरुण शुक्‍ला : जी हां हम बात कर रहे है मथुरा में हुई हिंसा की।...

रिश्ते की अहमियत!

तरुण शुक्‍ला: जब एक बच्चा मां के गर्भ में पनपता है, तभी से एक...

बेक़सूर निसार अहमद को मिली 23 साल बाद रिहाई, कहा ‘जिंदा लाश रह गया हूं मैं’

23 वर्ष पहले रामनगरी के एक विवादित ढांचे के गिराने के एक साल बाद 15...

हम से है दुनिया

तरुण शुक्‍ला:  हमारा समाज एक पुरूष प्रधान समाज रहा है। महिलाओं...

बढ़ती उम्र में ढलता बचपन

एक कहावत है की जिस तरह पेड़ धीरे धीरे बढ़ा होता है। ठीक उसी तरह...

मोदी सरकार की दशा और दिशा के दो साल, विकास की नई सोच के साथ मीडिया में बटोरी सुखिर्या

नई दिल्ली।  सत्‍ता संभालने के दो महीने बाद जब पहली बार भारत के...

Smartphone और Tab से टैलेंटेड होते बच्चे

तरुण शुक्‍ला:  हर माता पिता की एक ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा...

क्षेत्र से बढकर देश की भाषा है : डॉ सीएम झा

हम अपनों से प्यार करते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि प्यार जाहिर...