पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी नहीं रहे, देश में शोक की लहर

लगभग एक दशक बीमारी में गुजारने के बाद आखिरकार 93 साल की उम्र में अटल बिहारी बाजपेयी अपनी जिंदगी की जंग हार गए। पिछले 9 सप्ताह से एम्स में भर्ती अटल बिहारी बाजपेयी की हालत बीते दो दिनों में काफी गंभीर हो गई थी। यूरिन इन्फेक्शन और किडनी संबंधी परेशानी के चलते 11 जून को एम्स में उनको भर्ती कराया गया था। मधुमेह के शिकार वाजपेयी का काफी समय से सिर्फ एक गुर्दा काम कर रहा था।

कांग्रेस के बाद पांच साल तक पीएम बनने वाले पहले गैर कांग्रेसी
वाजपेयी जी बीजेपी के संस्‍थापकों में आते हैं वो 1996 से 1999 के बीच तीन बार पीएम चुने गए। वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार सिर्फ 13 दिनों तक ही रह पाई। 1998 में वह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, तब उनकी सरकार 13 महीने तक चली। 1999 में वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और 5 वर्षों का कार्यकाल पूरा किया। कार्यकाल पूरा करने वाले वह पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री बने।

वह 10 बार लोकसभा के लिए और 2 बार राज्यसभा के लिए चुने गए। उनके जन्मदिन 25 दिसंबर को ‘गुड गवर्नेंस डे’ के तौर पर मनाया जाता है। अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान हमेशा विपक्ष ने भी किया।

2005 से सक्रिय राजनीति से हुए अलग
कभी अपनी कविताओं और भाषणों से लोगों को दीवाना करने वाले वाजपेयी स्वास्थ्य खराब होने के कारण सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। 2005 में उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था और तब से वह अपने घर पर ही थे। अटल जी कई वर्षों से बोलने और लिखने में भी तकलीफ होती थी। कई सालों से वो लोगों को पहचान तक नहीं रहे थे।

दुनिया ने उन्हें 2015 में आखिरी बार तस्वीरों में देखा
आखिरी बार उनकी तस्वीर साल 2015 में सामने आई थी जब भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके आवास पर जाकर उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था। डॉक्टर रणदीप गुलेरिया पिछले तीन दशकों से पूर्व पीएम वाजपेयी के निजी डॉक्टर हैं। एम्स में भी वही उनका इलाज कर रहे थे।

डिमेंशिया की थी बीमारी
देश के पूर्व प्रधानमंत्री डिमेंशिया नाम की बीमारी से भी लंबे समय से पीड़ित थे। डिमेंशिया किसी खास बीमारी का नाम नहीं है बल्कि यह ऐसे लक्षणों को कहते हैं जब इंसान की मेमरी कमजोर हो जाती है और वह अपने रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाता। डिमेंशिया से पीड़ित लोगों में शॉर्ट टर्म मेमरी लॉस जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं। ज्यादातर डिमेंशिया के केसों में 60 से 80 प्रतिशत केस अलजाइमर के होते हैं। डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति के मूड में भी बार-बार बदलाव आता रहता है। वे जल्दी परेशान हो जाते हैं या ज्यादातर वे उदास या दुखी रहने लगते हैं।

यूएन में हिंदी का बढ़ाया था मान
1977 में जनता पार्टी की सरकार में अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री थे। उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भाषण देने का मौका मिला। वाजपेयी के हिंदी में दिए शानदार भाषण से अभिभूत UN के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश देते हुए मानवाधिकारों की रक्षा के साथ-साथ रंगभेद जैसे गंभीर मुद्दों का जिक्र किया था।




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