10 हजार युवाओं को मिलेगा योगा के क्षेत्र में रोजगार

योग विज्ञान पूरी दुनिया में तेजी के साथ अपना विस्‍तार कर रहा है। हाल ही में विश्‍व योगा दिवस पर दुनिया भर में आयोजित हुए कार्यक्रमों और सामने आई तस्‍वीरों से यह बात स्‍पष्‍ट हो गई कि योगा कितनी तेजी के साथ अपना बर्चस्‍व बढा रहा है। योग सिर्फ शरीर व मन स्‍वस्‍थ रखने का साधन नहीं है बल्कि यह एक ऐसा विज्ञान है जिसमें रोजगार की भी असीम संभावनाएं छिपी हुई हैं। हाल ही में प्रगति मैदान में आयोजित हुए योग शाला में योगा ज्ञान नाम की एकेडमी ने एक अलग तरह से योगा को प्रस्‍तुत करते हुए 10 हजार युवाओं को रोजगार देने की बात कही।scan0002yoga gyaan yogshala in pragati maidan (1)

इसकी जानकारी देते हुए योगा ज्ञान के को-फाउंडर नौनिहाल सिंह ने बताया कि,’’योगा के माध्‍यम से समाज को सशक्‍त करने के लिए हमने एक संकल्‍प लिया है। इसके तहत हम 100 योगा एकेडमी और स्‍टूडियो के जरिए पूरी दुनिया के 10 हजार युवाओं को रोजगार परक बनाएंगे। इसकी शुरुआत हमने कर दी है। “योग स्वास्थ्य और अध्यात्म के अलावा व्यापार की दृष्टी से भी अहम है। इसे व्‍यापारिक रूप देना जरूरी है। मैं चाहता हूं लोग इसमें रोजगार तलाशें। तभी यह इंडस्‍ट्री जल्‍दी से फले फूलेगी।‘’

 

  • 100 योगा एकेडमी और योगा स्‍टूडियो शुरू करेगा योगा ज्ञान
  • योग ज्ञान अध्‍यात्‍म के साथ व्‍यापार का देगा प्रशिक्षण

योग ज्ञान एकेडमी की मेंटर मिनाक्षी सूद ने कहा कि “योग एक ऐसा प्रोसेस है, जिसमें आसन की भाषा से आत्मा का ज्ञान होता है और योग ज्ञान अकादमी विश्वभर में ध्यान और नियमबंध होने का प्रतीक बनेगी”। और यह इंडस्‍ट्री उन सभी लोगों के लिए एक बेहतरीन प्‍लेटफॉर्म साबित होगा। योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्‍वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है।

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क्‍या है योग आइए आपको बताते हैं

योग एक आध्‍यात्मिक प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें शरीर मन और आत्‍मा को एक साथ लाने का काम होता है। इसका इतिहास काफी दिलचस्‍प रहा है। वेदों में इसका पूरा उल्‍लेख मिलता है। इसी से पता चलता है कि योग संस्‍कृति के योज शब्‍द से बना है। जिसका अर्थ है अपने मन और आत्‍मा को एक साथ लाना। योग शब्‍द पहले क‍था उपनिषद में नजर आया था। जहां ज्ञानेंद्रियों का नियंत्रण और मानसिक गति‍विधि के निवारण के अर्थ में प्रयुक्‍त हुआ है। जो उच्‍चतम स्थिति प्रदान करने वाला माना गया है।

भागवत गीता जैसे महत्‍वपूर्ण ग्रंथ भी योग की अवधारणा से संबंधित हैं एवं पतंजलि के योग सूत्र भी हैं। पतंजलि का लेखन अष्‍टांग योग का आधार बन गया है। इसके जरिए तनाव दूर होता है, मन को शांति मिलती है तथा यह मन को शुद्व करता है और शरीर निरोग रहता है।




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